मिथिला प्रदेश – एक परिचय:
मिथिला प्रदेश सदैव अपने गौरवशाली इतिहास का साक्षी रहा है | विश्व में जब भी ज्ञान, विज्ञान, अध्यात्म, नारी-शक्ति एवं मानवीय मूल्यों की चर्चा हुई, मिथिला प्रदेश का प्रतिनिधत्व सदैव अग्रणी रहा है | वर्तमान में मिथिला प्रदेश का भौगोलिक पररदृश्य अपने पुरातन प्रदेश बिहार राज्य से लेकर झारखण्ड राज्य एवं पड़ोसी देश नेपाल तक फैला हुआ है | हालांकि, मिथिलावासी, जिन्हे मैथिलवृंद भी कहा गया है, अपने ज्ञान-विज्ञानं एवं तीक्ष्ण बुवि के बल पर सिर्फ मिथिला ही नहीं अपितु पुरे विश्व के लगभग हर भूभाग में अपना परचम लहरा रहे हैं| मिथिला एक सांस्कृतिक क्षेत्र है जो अपनी बौद्धिक परम्परा के लिए भारत और
भारत के बाहर जानी जाती है | इस क्षेत्र की प्रमुख भाषा मैथिलि है, जिसे भारतीय संविधान के अष्टम अनुसूची में होने का गौरव प्राप्त है | हिन्दू धार्मिक ग्रंथों में सबसे पहले इसका संकेत शतपथ ब्राह्मण में तथा स्पष्ट उल्लेख वाल्मीकीय रामायण में मिलता है। मिथिला का उल्लेख महाभारत, रामायण, पुराण तथा जैन एवं बौद्ध ग्रन्थों में हुआ है। वृहद्विष्णुपुराण में मिथिला की सीमा (चौहद्दी) का स्पष्ट उल्लेख करते हुए कहा गया है कि – पूर्व में कोसी से आरंभ होकर पश्चिम में गंडकी तक 24 योजन तथा दक्षिण में गंगा नदी से आरंभ होकर उत्तर में हिमालय वन (तराई प्रदेश) तक 16 योजन मिथिला का विस्तार है। इस प्रकार उल्लिखित सीमा के अंतर्गत वर्तमान में नेपाल के तराई प्रदेश के साथ बिहार राज्य के पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, शेखपुरा, लख्खीसराय, जमुई, मुंगेर, अररिया, पूर्णिया, गोड्डा, बांका, दुमका, देवघर, जामतारा, पाकुर, साहेबगंज, कटिहार, किशनगंज और खगड़िया जिले का प्रायः पूरा भूभाग तथा भागलपुर जिले का आंशिक भूभाग आता है।
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